UP News: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार शहरों के विकास पर बड़ा फोकस कर रही है। अगले दो महीने में 18,283 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य, जानें किन शहरों को मिलेगा फायदा।
UP News: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार ने शहरी विकास को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश के शहरों और नगर निकायों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए नगर विकास विभाग को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की योजना है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में बची हुई बड़ी धनराशि का इस्तेमाल अगले दो महीने के भीतर विकास कार्यों पर किया जाए। इसके तहत करीब 18,283 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस अभियान के तहत शहरों में सड़क, नाली, सीवर, पार्क और अन्य जरूरी नागरिक सुविधाओं से जुड़े कामों को प्राथमिकता दी जाएगी। खास बात यह है कि उन इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां अभी तक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पाया है। शासन स्तर पर हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि विकास योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
योगी सरकार ने नगर विकास विभाग को दिया बड़ा टारगेट
दरअसल, वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश के नगर विकास विभाग को कुल 26,513 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। शासन स्तर पर 21 अक्टूबर तक की वित्तीय प्रगति की समीक्षा की गई तो सामने आया कि इस बजट में से 8,129 करोड़ रुपये की स्वीकृति जारी की जा चुकी थी। वहीं, उस समय तक 5,224 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे।
समीक्षा के दौरान बजट की शेष धनराशि के इस्तेमाल में तेजी लाने की जरूरत महसूस की गई। इसके बाद उच्चाधिकारियों ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि बची हुई राशि को निर्धारित समय सीमा में विकास कार्यों पर खर्च कराया जाए। सरकार का उद्देश्य है कि बजट का अधिकतम उपयोग करते हुए शहरों में आम लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसके लिए नगर निकायों को भी सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया है।
शहरों में सड़क, नाली और सीवर के कामों को मिलेगी रफ्तार
योगी सरकार की इस योजना का सबसे बड़ा असर स्थानीय स्तर पर होने वाले विकास कार्यों पर दिखाई दे सकता है। खासकर उन नए विकसित हो रहे इलाकों में सड़क और जल निकासी की समस्या दूर करने पर जोर दिया जाएगा, जहां आबादी बढ़ने के बावजूद जरूरी सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पाया है।
नगर विकास विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि निकाय क्षेत्रों में अधूरे और जरूरी विकास कार्यों को जल्द शुरू कराया जाए। इनमें सड़क निर्माण, नाली निर्माण, सीवर व्यवस्था में सुधार और अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं।
इसके अलावा सार्वजनिक पार्कों के निर्माण और पुराने पार्कों के सुधार पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर वातावरण और सार्वजनिक सुविधाएं मिल सकेंगी।
वंदन और आकांक्षी नगर योजना पर भी रहेगा फोकस
शहरों के विकास के लिए सरकार ने विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। इनमें वंदन योजना और आकांक्षी नगर योजना प्रमुख हैं।
वंदन योजना के तहत धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले शहरों से विकास कार्यों के प्रस्ताव मांगे गए हैं। शासन ने संबंधित अधिकारियों से कहा है कि इन प्रस्तावों को जल्द प्राप्त कर उनकी स्वीकृति और धनराशि जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
वहीं, आकांक्षी नगर योजना के अंतर्गत चयनित शहरों में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जरूरी परियोजनाओं पर काम तेज करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य शहरों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और लोगों को बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
इसके साथ ही स्थानीय निकायों में आयोजित होने वाले प्रांतीयकृत मेलों और प्रदर्शनियों से संबंधित प्रस्तावों को भी तत्काल आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
पार्कों के निर्माण और सुंदरीकरण पर भी खर्च होगा पैसा
नगर विकास विभाग को पंडित दीनदयाल उपाध्याय आदर्श नगर पंचायत योजना और उपन योजना के तहत पार्कों से जुड़े कार्यों में तेजी लाने को कहा गया है। इन योजनाओं के अंतर्गत नए पार्क विकसित करने के साथ पहले से मौजूद पार्कों का सुधार और सुंदरीकरण किया जाएगा। इससे नगर पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों की स्थिति बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का जोर केवल बड़े शहरों तक विकास कार्यों को सीमित रखने का नहीं है, बल्कि छोटे नगर निकायों में भी सुविधाओं का विस्तार करने की तैयारी है।
आचार संहिता लागू होने से पहले काम शुरू कराने की तैयारी
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए विकास कार्यों को लेकर सरकार की सक्रियता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव की घोषणा के बाद आदर्श आचार संहिता लागू होने पर नए विकास कार्यों से जुड़े टेंडर और सरकारी प्रक्रियाओं पर नियमानुसार प्रतिबंध लग सकते हैं।
इसी वजह से शासन स्तर पर पहले से स्वीकृत और प्रस्तावित विकास परियोजनाओं को जल्द आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बजट जारी होने के बाद नगर निकाय टेंडर प्रक्रिया पूरी करने और विकास कार्य शुरू कराने में अनावश्यक देरी न करें। इस पूरी कवायद का मकसद यह है कि चुनावी आचार संहिता लागू होने से पहले अधिक से अधिक विकास परियोजनाएं प्रक्रिया में आ जाएं और शहरी क्षेत्रों में जरूरी काम शुरू हो सकें।





