
राम नरेश ठाकुर
UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज करनी शुरू कर दी हैं। इसी बीच बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाली जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने उत्तर प्रदेश में भी अपनी सक्रियता बढ़ाने के संकेत दिए हैं। पार्टी ने वाराणसी से चुनावी अभियान की शुरुआत कर पूर्वांचल में संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस दौरान बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के बयान ने यूपी की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है।
वाराणसी के लोहता स्थित रामलीला मैदान में आयोजित जेडीयू के कार्यकर्ता सम्मेलन में पार्टी के कई बड़े नेता शामिल हुए। कार्यक्रम में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, बिहार सरकार के मंत्री और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। पूर्वांचल के अलग-अलग इलाकों से पहुंचे कार्यकर्ताओं की भागीदारी के बीच पार्टी नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी रणनीति के संकेत दिए।
निशांत कुमार ने NDA के साथ चुनाव लड़ने के दिए संकेत
कार्यकर्ता सम्मेलन में निशांत कुमार ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर पार्टी की संभावित रणनीति पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि जेडीयू की पहचान भले ही बिहार में मजबूत राजनीतिक आधार वाली पार्टी के रूप में हो, लेकिन इसका संगठन दूसरे राज्यों में भी सक्रिय रहा है।
उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों समेत देश के विभिन्न हिस्सों में पार्टी की राजनीतिक मौजूदगी का उल्लेख किया। निशांत कुमार ने उत्तर प्रदेश में जेडीयू के पुराने चुनावी प्रदर्शन को भी याद किया। उनके मुताबिक, साल 2002 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के दो उम्मीदवार विधायक बने थे, जबकि 2007 में जेडीयू को एक सीट पर सफलता मिली थी।
निशांत कुमार ने संकेत दिया कि जेडीयू इस बार उत्तर प्रदेश में एनडीए के सहयोगी दल के रूप में चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। हालांकि, गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर होने वाली बातचीत के बाद ही लिया जाएगा।
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या जेडीयू यूपी में बीजेपी के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरेगी। फिलहाल सीटों की संख्या और चुनावी गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
पूर्वांचल से ही JDU ने क्यों शुरू की चुनावी तैयारी?
जेडीयू की ओर से वाराणसी को चुनावी अभियान की शुरुआत के लिए चुनना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। पूर्वांचल उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण क्षेत्र है और यहां कई विधानसभा सीटों पर स्थानीय समीकरण चुनावी नतीजों को प्रभावित करते हैं।
पार्टी इस क्षेत्र में अपने पुराने कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करने और संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत बनाने की कोशिश कर रही है। वाराणसी में आयोजित सम्मेलन को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। जेडीयू का फोकस फिलहाल कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करने और पार्टी की राजनीतिक मौजूदगी को विस्तार देने पर दिखाई दे रहा है।
संजय झा ने कहा- प्रेशर पॉलिटिक्स नहीं है पार्टी का उद्देश्य
सम्मेलन में जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी पार्टी की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि बिहार में जेडीयू और बीजेपी समेत एनडीए के सहयोगी दल मिलकर सरकार चला रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में पार्टी की गतिविधियों को दबाव की राजनीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
संजय झा के मुताबिक, जेडीयू पहले भी उत्तर प्रदेश में सक्रिय रही है और अब 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपने कार्यकर्ताओं से संपर्क कर रही है। पार्टी का मकसद संगठन को मजबूत करना और पुराने साथियों के साथ संवाद बढ़ाना है।
यूपी में NDA के सीट बंटवारे पर रहेगी नजर
जेडीयू की वाराणसी से शुरू हुई राजनीतिक गतिविधियों ने उत्तर प्रदेश में एनडीए के संभावित चुनावी समीकरणों को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। अगर पार्टी बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने का फैसला करती है, तो सीटों के बंटवारे का मुद्दा भी अहम होगा। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि जेडीयू कितनी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहेगी और बीजेपी के साथ उसकी बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
फिलहाल वाराणसी का कार्यकर्ता सम्मेलन जेडीयू की यूपी में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता का संकेत है। निशांत कुमार के बयान के बाद अब सबकी नजर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के फैसले और एनडीए के भीतर होने वाली आगामी बातचीत पर टिकी है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि जेडीयू उत्तर प्रदेश में केवल संगठन मजबूत करेगी या गठबंधन के साथ चुनावी मुकाबले में भी उतरेगी।





