कानूनी जागरूकता बढ़ाने की दिशा में आईएमएस का सराहनीय कदम

Legal Aid Clinic in Noida

ऋषी तिवारी


न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने और आमजन में कानूनी जागरूकता फैलाने के महत्वपूर्ण मिशन के तहत आईएमएस लॉ कॉलेज, नोएडा में ‘फ्री लीगल एड क्लिनिक’ का आयोजन किया गया। नोएडा सेक्टर-62 स्थित संस्थान परिसर में आयोजित इस विशेष शिविर में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिवक्ता (एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड) आदर्श वर्मा ने बतौर विशेषज्ञ शिरकत की और लोगों के उन कानूनी गुत्थियों को सुलझाया, जिनका समाधान आम आदमी के लिए महंगा और कठिन होता है। यह कार्यक्रम संस्थान की ‘लीगल एड सोसायटी’ के तत्वावधान में “नो फीस, जस्टिस फॉर ऑल” (कोई फीस नहीं, सबको न्याय) के अनूठे संदेश के साथ आयोजित किया गया।

समाज के हर वर्ग को मिला लाभ

बता दें कि क्लिनिक के दौरान स्थानीय निवासियों की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर विशेषज्ञों से गुफ्तगू की। इस दौरान लोगों को पारिवारिक विवाद, संपत्ति एवं किरायेदारी विवाद, उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े मामले, श्रम एवं रोजगार संबंधी अधिकार और आपराधिक कानून जैसे जटिल मुद्दों पर विस्तार से परामर्श दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आदर्श वर्मा ने अपने वर्षों के अनुभव और विशेषज्ञता के आधार पर संवैधानिक, सिविल एवं पब्लिक लॉ से जुड़े मामलों में लोगों को मार्गदर्शन दिया। उन्होंने उपस्थित लोगों के हर सवाल का धैर्यपूर्वक जवाब देते हुए उन्हें उनके कानूनी अधिकारों और उपलब्ध कानूनी उपायों की पूरी जानकारी दी।

संस्थान ने बताया इस पहल को सार्थक

आईएमएस लॉ कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. अंजुम हसन ने इस कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कार्यक्रम समाज सेवा एवं कानूनी सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। हमारा उद्देश्य है कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक कमजोरी के कारण न्याय से वंचित न रहे। यह पहल समाज में न्याय के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

वहीं, लीगल एड सोसाइटी के संयोजक डॉ. संतोष सती ने बताया कि यह पहल समाज के जरूरतमंद वर्गों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई। उन्होंने भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि संस्थान भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों का नियमित आयोजन करता रहेगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक निशुल्क कानूनी सहायता पहुंच सके और समाज में न्याय के प्रति जागरूकता को और सशक्त किया जा सके।

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