
राम नरेश ठाकुर
बिहार की राजधानी पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान रविवार (30 नवंबर 2025) को एक अलग ही रंग में डूबा, जब यहां नेशनल रेड रन 4.0 का भव्य आयोजन हुआ। विश्व एड्स दिवस (1 दिसंबर) की पूर्व संध्या पर कराई गई यह राष्ट्रीय स्तर की दौड़ एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने और संक्रमित लोगों से जुड़े सामाजिक भेदभाव को खत्म करने के मकसद से आयोजित की गई। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के मार्गदर्शन में बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति (BSACS) ने इस चौथे संस्करण की मेजबानी की, जिसमें देश के 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए धावक, अधिकारी, खिलाड़ी और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि मैदान पर उतरे।
नेशनल रेड रन क्या है और पटना वाला चौथा संस्करण क्यों खास?
रेड रन सिर्फ एक मैराथन नहीं, बल्कि एड्स के खिलाफ लड़ाई की वैश्विक निशानी—लाल रिबन—से जुड़ा जन-जागरूकता अभियान है। NACO और विभिन्न राज्यों की एड्स नियंत्रण सोसाइटी इसे हर साल अलग-अलग राज्यों में कराती हैं, ताकि खेल की ऊर्जा को स्वास्थ्य संदेश के साथ जोड़ा जा सके। इसका चौथा संस्करण बिहार के हिस्से में आया, जो राज्य के लिए गौरव की बात है। वेदना के प्रतीक लाल रंग की टी-शर्ट पहने धावक जब गांधी मैदान की परिधि पर दौड़े, तो संदेश साफ था—एचआईवी से बचाव और संवेदनशीलता दोनों पर देश एक साथ चल रहा है।
10 KM दौड़ और 2 KM वॉकथॉन: गांधी मैदान पर उमड़ा जनसैला
आयोजन का मुख्य आकर्षण 10 किलोमीटर की प्रतियोगितात्मक दौड़ रही, जिसमें लगभग 250 चुनिंदा धावकों ने हिस्सा लिया। वहीं 2 किलोमीटर के वॉकथॉन में करीब 1,000 लोग शामिल हुए। स्कूल-कॉलेज के युवा, स्वास्थ्यकर्मी, अधिकारी और आम परिवारों तक ने इसमें उत्साह से हिस्सा लिया। वॉकथॉन की अवधारणा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उन लोगों को भी जोड़ती है जो प्रोफेशनल धावक नहीं हैं, लेकिन जागरूकता के संदेश का हिस्सा बनना चाहते हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री कुमार रवि ने कहा कि एचआईवी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और उससे जुड़े भेदभाव को खत्म करने में युवाओं की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ सालों में निरंतर चल रहे जागरूकता अभियानों, बेहतर उपचार सुविधाओं और समयबद्ध प्रयासों के चलते HIV नियंत्रण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। समाज की सोच बदल रही है और दवाइयों की उपलब्धता ने संक्रमित लोगों में नई उम्मीद जगाई है।
मां से बच्चे को होने वाला संक्रमण, अगला बड़ा लक्ष्य
स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि आगे भी प्रयास जारी रखते हुए एचआईवी की रोकथाम के साथ-साथ मां से बच्चे को होने वाले संक्रमण को पूरी तरह रोकने की दिशा में काम करना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि HIV केवल यौन संपर्क से नहीं, बल्कि संक्रमित रक्त और अन्य माध्यमों से भी फैल सकता है—इसलिए सही जानकारी समाज के हर वर्ग तक, खासकर युवाओं तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने BSACS के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और उनकी टीम को आयोजन के लिए बधाई दी तथा यूनिसेफ सहित राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों का आभार जताया।
बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के प्रोजेक्ट डायरेक्टर श्री सुमित कुमार ने कहा कि 10 KM दौड़ और 2 KM वॉकथॉन में इतनी बड़ी संख्या में सहभागिता यह साबित करती है कि HIV के खिलाफ लड़ाई में पूरा देश एक मुट्ठी में बंधा है। उन्होंने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए प्रतिभागियों व अधिकारियों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता अभियान को और तेज करें।
NACO और UNICEF का संदेश: जांच कराना भी उतना ही जरूरी
NACO की डिप्टी डायरेक्टर जनरल डॉ. तान्जिन डिकिड ने प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि HIV के प्रति सही जानकारी फैलाने में युवाओं की हिस्सेदारी बेहद महत्वपूर्ण है और ऐसे आयोजन भेदभाव मिटाने में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं UNICEF की फील्ड ऑफिसर मोनिका नेल्सन ने हर व्यक्ति को समय-समय पर HIV जांच कराने की सलाह दी। उनके मुताबिक गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच हो जाए, तो गर्भावस्था के दौरान उचित उपचार और देखभाल से मां से बच्चे को संक्रमण का खतरा काफी हद तक टाला जा सकता है।
जागरूकता तभी कारगर होती है जब जानकारी सही हो। HIV संक्रमण के मुख्य माध्यम हैं—बिना सुरक्षा का यौन संपर्क, संक्रमित रक्त का आदान-प्रदान, संक्रमित सुई-सिरिंज का इस्तेमाल और गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान मां से बच्चे को संक्रमण। इसके उलट, हाथ मिलाने, गले लगाने, एक ही बर्तन इस्तेमाल करने या मच्छर के काटने से HIV नहीं फैलता। समय रहते जांच कराने और नियमित एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) लेने वाला व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ जीवन जी सकता है—यही संदेश रेड रन जैसे आयोजन बार-बार दोहराते हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय और NACO के आंकड़े बताते हैं कि देश में 2010 की तुलना में नए HIV संक्रमण में लगभग 44 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि एड्स से होने वाली मौतें लगभग 80 प्रतिशत तक घटी हैं। यह प्रगति जागरूकता, जांच और निःशुल्क उपचार के संयुक्त प्रयासों का ही नतीजा है। नेशनल रेड रन 4.0 जैसे कार्यक्रम इसी गति को बनाए रखने की कड़ी हैं।





