
बिहार में मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार अब खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को जिला स्तर तक मजबूत करने जा रही है। इसी कड़ी में 26 नए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अलग-अलग जिलों में तैनात किया गया है। इनके आने से अब प्रदेश के सभी जिलों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी, प्रतिष्ठानों का निरीक्षण और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को गति मिलेगी। इसके अलावा भागलपुर, मुजफ्फरपुर, मुंगेर और पूर्णिया में नई खाद्य जांच प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है।
स्वास्थ्य मंत्री ने 26 अधिकारियों को सौंपे प्रशिक्षण प्रमाणपत्र
शुक्रवार को पटना स्थित स्वास्थ्य विभाग के सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने प्रशिक्षण पूरा करने वाले 26 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए। इन अधिकारियों को निर्धारित प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी करने के बाद राज्य के विभिन्न जिलों में पदस्थापित किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आम लोगों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और स्वच्छ खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए खाद्य सुरक्षा से जुड़ी निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। नए अधिकारियों की नियुक्ति से जिलों में निरीक्षण और कार्रवाई की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित होगी।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से समझें और पूरी ईमानदारी के साथ काम करें। खाद्य पदार्थों में मिलावट, खराब गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों की अनदेखी जैसी शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
अब त्योहारों तक सीमित नहीं रहेगा खाद्य सुरक्षा अभियान
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पहले पर्याप्त मानवबल उपलब्ध नहीं होने के कारण खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कई गतिविधियां मुख्य रूप से पटना और आसपास के क्षेत्रों तक सीमित रह जाती थीं। खासकर त्योहारों के समय खाद्य पदार्थों की जांच और छापेमारी पर अधिक ध्यान दिया जाता था।
अब सभी जिलों में अधिकारियों की उपलब्धता होने के बाद इस व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा अभियान को पूरे साल नियमित रूप से संचालित करने की योजना है। इसका उद्देश्य केवल त्योहारों के दौरान मिठाई, दूध, तेल, मसाले और अन्य खाद्य पदार्थों की जांच करना नहीं, बल्कि सामान्य दिनों में भी बाजारों और खाद्य प्रतिष्ठानों पर निगरानी बनाए रखना है।
नई व्यवस्था के तहत होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकान, किराना प्रतिष्ठान, खाद्य निर्माण इकाइयों और अन्य संबंधित संस्थानों का नियमित निरीक्षण किया जा सकेगा। जहां खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन मिलेगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
चार जिलों में स्थापित होंगी नई खाद्य जांच प्रयोगशालाएं
खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने प्रयोगशाला सुविधाओं के विस्तार पर भी ध्यान दिया है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि पटना स्थित खाद्य जांच प्रयोगशाला के जीर्णोद्धार का काम किया जा रहा है। इसके साथ ही राज्य के चार अन्य जिलों में नई प्रयोगशालाएं स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।प्रस्तावित योजना के अनुसार भागलपुर, मुजफ्फरपुर, मुंगेर और पूर्णिया में खाद्य जांच प्रयोगशालाएं स्थापित करने की दिशा में पहल की जा रही है।
इन प्रयोगशालाओं के शुरू होने से खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। अभी नमूनों की जांच के लिए उपलब्ध प्रयोगशाला संसाधनों पर निर्भरता रहती है। जिला स्तर के आसपास जांच सुविधाओं का विस्तार होने से नमूनों के परीक्षण और रिपोर्ट प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनाई जा सकेगी।इससे मिलावट की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई करने और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा करने में मदद मिलेगी।
निरीक्षण के दौरान कारोबारियों को भी दी जाएगी जानकारी
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के सचिव सह खाद्य सुरक्षा आयुक्त श्री कुमार रवि ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा का विषय सीधे तौर पर आम लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। इसलिए इस क्षेत्र में काम करने वाले अधिकारियों को तकनीकी और वैज्ञानिक जानकारी से लगातार अपडेट रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण के दौरान केवल कमियां तलाशना ही अधिकारियों का काम नहीं है। उन्हें प्रतिष्ठान संचालकों को खाद्य सुरक्षा के निर्धारित नियमों, स्वच्छता संबंधी प्रावधानों और जरूरी मानकों की जानकारी भी देनी चाहिए।
यदि किसी प्रतिष्ठान में सुधार की गुंजाइश है तो संबंधित नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत संचालक को सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए। हालांकि गंभीर अनियमितता और नियमों के उल्लंघन के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई भी जरूरी है।
कुमार रवि ने अधिकारियों को खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों, उनके संभावित दुष्प्रभावों और खाद्य गुणवत्ता से संबंधित वैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर काम करते समय वरीय अधिकारियों के निर्देशों और विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
40 दिनों तक दिया गया विशेष प्रशिक्षण
खाद्य सुरक्षा अधिकारी के रिक्त पदों पर कार्य करने के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार चयनित 26 चिकित्सकों, पदाधिकारियों और कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण की अवधि कुल 40 दिन निर्धारित थी। इसमें 14 दिन का सैद्धांतिक प्रशिक्षण और 26 दिन का व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल रहा।
सैद्धांतिक प्रशिक्षण तेलंगाना स्थित डॉ. मैरी चेन्ना रेड्डी मानव संसाधन विकास संस्थान में आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के 50वें प्रारंभिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत दिया गया।
वहीं, व्यावहारिक प्रशिक्षण पटना के शास्त्री नगर स्थित डी.एन.एस. क्षेत्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान में कराया गया। इस दौरान प्रशिक्षुओं को वास्तविक परिस्थितियों में खाद्य सुरक्षा से संबंधित जिम्मेदारियों के निर्वहन का अभ्यास कराया गया।
दूध, मांस और खाद्य निर्माण इकाइयों के निरीक्षण की मिली जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों को खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच से जुड़ी बारीकियों से अवगत कराया गया। उन्हें बताया गया कि किसी खाद्य प्रतिष्ठान में स्वच्छता, उत्पादन प्रक्रिया और खाद्य सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन किस तरह किया जाता है।
इसके अलावा दूध प्रसंस्करण केंद्रों, मांस प्रसंस्करण इकाइयों और अधिक जोखिम वाले खाद्य कारोबारों का निरीक्षण करने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
अधिकारियों ने खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र करने, उन्हें सुरक्षित तरीके से प्रयोगशाला तक पहुंचाने और जांच रिपोर्ट का विश्लेषण करने का अभ्यास किया। प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि यदि किसी खाद्य पदार्थ में निर्धारित मानकों से संबंधित गड़बड़ी मिलती है तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ किस प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा से जुड़े ऑनलाइन पोर्टलों के संचालन, डिजिटल निगरानी और जिले के लिए निरीक्षण योजना तैयार करने की जानकारी भी दी गई।
नियम तोड़ने वाले खाद्य प्रतिष्ठानों पर जारी रहेगी कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग की खाद्य सुरक्षा इकाई पहले से ही राज्य के विभिन्न जिलों में खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों की जांच कर रही है। संदिग्ध खाद्य पदार्थों की पहचान होने पर नमूने लिए जाते हैं और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है।
जांच में निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों और प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। विभाग का उद्देश्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को मिलावट और असुरक्षित खाद्य सामग्री से बचाना है।
26 नए अधिकारियों की पदस्थापना से इस काम को जिला स्तर पर और मजबूती मिलने की उम्मीद है। अब विभाग के पास निरीक्षण, नमूना संग्रह और नियमों के अनुपालन की निगरानी के लिए अधिक मानवबल उपलब्ध होगा।
कार्यक्रम में कई वरीय अधिकारी रहे मौजूद
प्रमाणपत्र वितरण समारोह में स्वास्थ्य विभाग के सचिव सह खाद्य सुरक्षा आयुक्त श्री कुमार रवि के अलावा स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव श्री धनंजय कुमार, बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक श्री सुब्रत कुमार सेन, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक श्री नवल किशोर चौधरी और राज्य आयुष समिति के कार्यपालक निदेशक श्री वैभव चौधरी उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री सुरेंद्र राय, विभाग के अन्य वरीय पदाधिकारी और प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी 26 खाद्य सुरक्षा अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
कुल मिलाकर, बिहार में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को जिला स्तर पर मजबूत करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ने और जांच प्रयोगशालाओं का विस्तार होने से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी रखने में मदद मिलेगी। इससे आम उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने और मिलावट के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने की व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।





