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हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी । तुम देखी सीता मृगनयनी ।। रामायण पाठ से मानव कल्याण संभव: स्वामी पंचमानंद जी महाराज

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By hindprabhatsamachar On June 13, 2025
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ऋषि तिवारी


नोएडा। सेक्टर 93 स्थित सुपर एमआईजी सनातन धर्म मंदिर में आयोजित श्रीराम कथा के आठवें दिन कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी पंचमानंद महाराज ने कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भरत जी चित्रकूट में भगवान राम से मिलते हैं। भगवान राम उनको गले से लगा लेते हैं और पिता का वचन याद दिला कर वापस अयोध्या भेज देते हैं। आगे भगवान राम पंचवटी में निवास करते हैं जहां पर रावण की बहन सूर्पनखा पहुंचती है और विवाह का प्रस्ताव रखती है। बार बार मना करने पर भी नहीं मानती है तो लक्ष्मण जी उसके नाक कान काट लेते हैं। रावण दरबार में सुर्पणखा विलाप करती हुई पहुंचती हैं।

रावण ने उसकी दशा देखकर पूछा कि तेरे नाक कान किसने काटे। सुर्पणखा ने कहा कि राम लक्ष्मण दशरथ के पुत्र हैं। राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने नाक कान काटे है और उन्होंने खर दूषण और त्रिसरा का भी वध कर दिया। रावण सोचता हैं खर दूषण को मारने वाला निश्चित ही कोई अवतार है।‘‘ तो मै जाइ बैर हठि करऊॅ। प्रभु सर प्रान तजे भव तरऊॅ’’। रावण मारीचि के पास जाता हैं और राम से बदला लेने के लिए कपट मृग बनने को कहता हैं। मारीचि सोने का मृग बनकर पंचवटी से निकलता हैं तो सीता राम जी से उस स्वर्ण मृग की खाल लाने को कहती हैं। राम जी उसके पीछे जाते है और उस स्वर्ण मृग को एक बाण से मार देते हैं। मारीचि मरते समय हा लक्ष्मण हा लक्ष्मण की आवाज करता हैं। सीता जी ने राम को संकट में जानकर लक्ष्मण को उनकी सहायता में भेजती है।

मौका देखकर लंकेश साधु का वेश रखकर सीता को जबरदस्ती सीता को रथ में बैठाकर आकाश मार्ग से जाता हैं।‘‘ गीधराज सुनि आरत बानी। रघुकुलतिलक नारि पहिचानी’’। जटायु रावण पर हमला कर देते हैं इसके बाद लंकेश जटायु के पंख तलवार से काट देता है। इधर राम लक्ष्मण पंचवटी पहुंचते हैं वहां पर सीता को न पाकर दुःखी होकर ढूंढने लगते हैं।‘‘ हे खग मृग हे मधुकर श्रेनी तुम देखी सीता मृग नैनी’’। रास्ते में घायल गिद्व राज जटायु मिलते हैं वह सारा वृतांत बताते हैं और भगवान की गोद में अपने प्राण त्याग देते हैं। उसके बाद भगवान सबरी के आश्रम पहुंचते हैं जहां पर प्रेम भक्ति में सबरी के झूठे बेर खाते हैं। श्रीराम कथा के नौवें दिन हनुमान जी राम जी की भेंट, सुग्रीव मित्रता, बाली वध, सीता खोज, लंका दहन, रावण वध और राम राज्याभिषेक आदि प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इस मौके पर राजवीर सिंह, राजेश कुमार गुप्ता, वीरेंद्र द्विवेदी, शैलेश द्विवेदी, राज दूबे, एल एस तिवारी, विजय झा, देवमणि शुक्ल, संजय पांडेय, अंगद सिंह तोमर,रवि राघव, गोरे लाल, रमेश कुमार वर्मा, हरि शंकर सिंह, रमेश चंद्र दास, हंसमणि शुक्ल, धर्मेंद्र सिंह,विकास शर्मा, विश्वनाथ त्रिपाठी, आचार्य गौरव, धर्मेंद्र कुमार मिश्रा, विनय त्रिवेदी, आदित्य अग्रवाल, जितेंद्र सतपति, संगम प्रसाद मिश्रा, सर्वेश तिवारी उमाकांत त्रिपाठी, श्याम मौर्य, दिनेश पाठक, विवेक कुमार सिंह, अनिल चौधरी, रंजन गिरि, प्रमोद भारद्वाज, राम भरोसे झा, रमेश चंद्र शर्मा सहित तमाम सेक्टरवासी भक्त मौजूद रहे।

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