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अहमदाबाद और मुंबई में होंगे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, ‘प्लास्टीवर्ल्ड’ प्रदर्शनी से खुलेगा वैश्विक मंच

hindprabhatsamachar
By hindprabhatsamachar On July 15, 2025
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ऋषि तिवारी


नई दिल्ली। भारत अब वैश्विक प्लास्टिक व्यापार में अपनी उपस्थिति को एक निर्णायक मोड़ पर ले जाने को तैयार है। ऑल इंडिया प्लास्टिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एआईपीएमए) ने “मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड” के विजन के तहत एक महत्वाकांक्षी रणनीति की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य है — प्लास्टिक फिनिश्ड उत्पादों के निर्यात को अगले तीन वर्षों में चार गुना तक बढ़ाना।

यह जानकारी नई दिल्ली में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में एआईपीएमए गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन श्री अरविंद मेहता ने दी। उन्होंने कहा, “यह योजना केवल व्यापार का विस्तार नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक प्लास्टिक हब के रूप में स्थापित करने का एक राष्ट्रीय मिशन है।”

श्री मेहता ने बताया कि विश्व में प्लास्टिक फिनिश्ड उत्पादों का व्यापार लगभग 1300 अरब डॉलर का है, जबकि भारत की हिस्सेदारी मात्र 12.5 अरब डॉलर यानी कुल वैश्विक भागीदारी का केवल 1.2% है। उदाहरणस्वरूप, अमेरिका अकेले 72.35 अरब डॉलर का प्लास्टिक आयात करता है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी नगण्य 1.2% ही है। यह वृद्धि 2–3 नए पॉलीमर प्लांट्स की स्थापना, प्लास्टिक मशीनरी और सहायक इकाइयों में 100% विस्तार, तथा एमएसएमई-आधारित विनिर्माण को तेज़ कर सकती है। अधिक उद्यमी जुड़ेंगे, रोजगार और कौशल की मांग बढ़ेगी। भारत सरकार का समय पर सहयोग अत्यंत आवश्यक है। कैंटन फेयर से मिली सीख निर्यात नीति को दिशा दे सकती है।

यह उद्योग मुख्यतः लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र पर आधारित है। देशभर में 50,000 से अधिक इकाइयाँ कार्यरत हैं, जो लगभग 46 लाख लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान कर रही हैं। एआईपीएमए का अनुमान है कि यदि यह निर्यात लक्ष्य पूरा होता है, तो यह रोजगार के अवसरों को 60 लाख तक पहुँचा सकता है।

श्री अरविंद मेहता ने कहा कि, “यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि लाखों एमएसएमई इकाइयों को सशक्त बनाने, देश में रोजगार बढ़ाने और भारत को वैश्विक प्लास्टिक उत्पादों का केंद्र बनाने का एक समग्र मिशन है।”

उन्होंने बताया कि एआईपीएमए के एक्सपोर्ट सेल ने वर्ष 2021 से 2023 के बीच 14 महीनों की अवधि में 21 प्रमुख आयातक देशों (जैसे अमेरिका, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान आदि) और 9 प्रमुख एचएसएन कोड श्रेणियों (जैसे 39, 56, 63, 85 आदि) का गहन विश्लेषण किया। यह अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि भारत के पास चीन और वियतनाम जैसे देशों की जगह लेने की अपार संभावनाएँ हैं — विशेषकर गुणवत्ता और लागत के स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता के साथ।

अपने इस मिशन को साकार करने हेतु एआईपीएमए वर्ष 2025 में तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने जा रही है — पहला सम्मेलन 17 जुलाई को दिल्ली में, दूसरा 22 अगस्त को अहमदाबाद में और तीसरा सम्मेलन 17 सितंबर को मुंबई में आयोजित किया जाएगा।

इन आयोजनों में निर्यातक, नीति-निर्माता, वैश्विक खरीदार और व्यापार विशेषज्ञ एक मंच पर जुटेंगे, ताकि रणनीति, नेटवर्किंग और साझेदारी के नए अवसर सृजित किए जा सकें। इस संवाददाता सम्मेलन में एआईपीएमए के उपाध्यक्ष (वित्त) श्री सुनील शाह, श्री सुनील मोंगा और मुकेश पटानी भी उपस्थित थे।

इसके अतिरिक्त, वर्ष के अंत तक एआईपीएमए द्वारा ‘प्लास्टीवर्ल्ड’ नामक भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी, जो विशेष रूप से प्लास्टिक फिनिश्ड उत्पादों पर केंद्रित होगी। इसमें घरेलू उत्पादों से लेकर मेडिकल, ऑटोमोबाइल, और स्पोर्ट्स प्लास्टिक तक की श्रेणियों को वैश्विक खरीदारों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

एआईपीएमए का एडवांस मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी एक्सीलेंस सेंटर (एएमटीईसी) भारत की युवा प्रतिभाओं को प्रशिक्षित कर रहा है — प्रोटोटाइप निर्माण, टूल डिज़ाइन और उत्पाद नवाचार जैसे क्षेत्रों में। साथ ही, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (एफआईईओ) के सहयोग से एआईपीएमए भारत को एक नवाचार-आधारित, भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी निर्यात हब बनाने की दिशा में कार्यरत है।

आज भारत का प्लास्टिक उद्योग केवल उत्पादन तक सीमित नहीं, बल्कि यह गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक विश्वास का प्रतीक बनकर उभर रहा है। सही रणनीति, सरकारी समर्थन और उद्यमिता की भावना के साथ भारत “प्लास्टिक का विश्वगुरु” बनने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है

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