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बीएमटी विभाग ने विश्व थैलेसीमिया दिवस के अवसर पर किया प्रोग्राम

hindprabhatsamachar
By hindprabhatsamachar On May 8, 2024
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ऋषि तिवारी


गुरुग्राम। फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम के हेमेटोलॉजी, पिडियाट्रिक हेमेटोलॉजी ओंकोलॉजी एंड बीएमटी विभाग ने विश्व थैलेसीमिया दिवस के अवसर पर एक खास प्रोग्राम – ‘थैलेसीमिया-फ्रीः टुगेदर वी कैन’ का आयोजन किया। इसका मकसद, सरवाइवर स्टोरीज़ के माध्यम से थैलेसीमिया के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। इस मौके पर कई जानी-मानी हस्तियों के अलावा बॉलीवुड और टीवी एक्टर भी उपस्थित थे।

जाने माने बॉलीवुड एक्टर रज़ा मुराद इस समारोह के मुख्य अतिथि थे ओर डोनल बिष्ट ओर नीता शेट्टी मानद अतिथि के तौर पर उपस्थित थे। फोर्टिस अस्पताल में थैलेसीमिया का सफल उपचार करा चुके बच्चे भी इस मौके पर मौजूद थे जिन्होंने थैलेसीमिया के साथ जीवन बिताने के अपने अनुभवों को साझा किया।

फोर्टिस में थैलेसीमिया का सफल उपचार करा चुके इन बच्चों ने अपनी प्रेरक कहानियां बतायीं। कार्यक्रम में भाग लेने वाले इन बहादुर बच्चों में लविशा जैन, कशिश, आर्यन दत्तानी और कविश मेनारिया शामिल थे जिन्होंने हेमाटोपोएटिक स्टैम सैल ट्रांसप्लांटेशन (HSCT), जिसे बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन (बीएमटी) भी कहते हैं, के जीवन बदल देने वाले प्रभाव के बारे में बताया। मास्टर् कविश के छोटे भाई ने बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन के लिए मैच्ड डोनेशन किया था जबकि मास्टर् आर्यन, सुश्री कशिश और बेबी लविशा के लिए उपयुक्त मैच तलाश करने में DATRI जैसी अनरिलेटेड डोनर रजिस्ट्री ने काफी मदद की।

थैलेसीमिया के बारे में जागरूकता बढ़ाने के इस प्रयास के प्रति अपना समर्थन देते हुए बॉलीवुड के जाने माने एक्टर रज़ा मुराद ने कहा, “फोर्टिस हैल्थकेयर द्वारा इस परोपकारी पहल का आयोजन सुखद घटना है। इसके जरिए थैलेसीमिया के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ उचित उपचार और देखभाल के महत्व को भी रेखांकित किया गया। जेनेटिक विकार होने की वजह से थैलेसीमिया भारत में काफी प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है जिसके कारण अपर्याप्त हिमोग्लोबिन का निर्माण होता है और परिणामस्वरूप लाल रक्त कणिकाओं (रैड ब्लड सैल्स) की कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा, बार-बार अक्सर मेडिकल केयर की आवश्यकता और अन्य संबंधित स्वास्थ्य चुनौतियों की वजह से मरीज के लिए यह भावनात्मक दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन सही उपचार और सपोर्ट मिलने से हम काफी हद तक लोगों की लाइफ क्वालिटी में सुधार कर बेहतर भविष्य के लिए उम्मीद बढ़ा सकते हैं।”

जानी मानी टीवी एक्टर डोनल बिष्ट ने कहा, “ थैलेसीमिया से बचाव को केवल मेडिकल चुनौती की तरह नहीं लेना चाहिए बल्कि स्वस्थ समाज का निर्माण करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी होना चाहिए। शहरी क्षेत्रों में इसके बारे में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन सभी हितधारकों को नियमित स्क्रीनिंग, खासतौर से टियर 1 और टियर 2 शहरों में जहां यह रोग अधिक फैला हुआ है, के लिए आपस में अवश्य सहयोग करना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रेग्नकेंट महिलाओं की हैल्थ स्क्रीनिंग अनिवार्य होनी चाहिए और आशा कर्मियों द्वारा इसे सुपरवाइज़ किया जाना चाहिए ताकि इस आनुवांशिक विकार के प्रसार पर अंकुश लगाया जा सके।”

सुप्रसिद्ध टीवी एक्टर नीता शेट्टी ने कहा, “थैलेसीमिया मरीजों को आजीवन इलाज की जरूरत होती है और ऐसे में उनके लिए सुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन सुविधा का इंतजाम करना काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि इन मरीजों को बार-बार ट्रांसफ्यून और स्पेश्यलाइज़्ड उपचार की जरूरत होती है। इस कारण मरीजों के परिवारों समेत हैल्थकेयर पर काफी वित्तीय तथा भावनात्मक दबाव बढ़ता है। अगली पीढ़ी को थैलेसीमिया से बचाने के लिए प्रीमैराइटल स्क्रीनिंग और जेनेटिक काउंसलिंग काफी जरूरत कदम हैं क्योंकि इनसे संभावित कैरियर की पहचान कर सुरक्षित भविष्य सुनिश्चत किया जा सकता है।”

डॉ विकास दुआ, प्रिंसीपल डायरेक्टर एवं हैड, पिडियाट्रिक हेमेटोलॉजी, पिडियाट्रिक हेमेटो ओंकोलॉजी एंड बीएमटी, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम ने कहा, “भारत को दुनिया की थैलेसीमिया राजधानी का दर्जा हासिल है जहां करीब 42 मिलियन थैलेसीमिया कैरियर और लगभग 100,000 मरीज β थैलेसीमिया सिंड्रोम से ग्रस्त हैं। इन चौंकाने वाले आंकड़ों के बावजूद देश में थैलेसीमिया के उपचार की सुविधाओं के बारे में जानकारी का अभाव है। लेकिन CRISPR जीन एडिटिंग थैलेसीमिया से बचाव के लिए बेहद महत्वपूर्ण थेरेपी है। फोर्टिस गुरुग्राम के पास बेहद जटिल मामलों के इलाज के लिए हेमेटोलॉजिस्ट की एक समर्पित टीम के अलावा शानदार मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस टैक्नोलॉजी उपलब्ध है। पिछले साल, हमने कोल इंडिया के साथ मिलकर, इस सार्वजिनक क्षेत्र के उपक्रम के सीएसआर इनीशिएटिव के अंतर्गत ‘थैलेसीमिया बाल सेवा योजना’ के जरिए समाज के कम सुविधाप्राप्त तबकों के थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों का उपचार किया। अब तक हम तीन बच्चों का इलाज इस पहल के तहत् कर चुके हैं।”

डॉ राहुल भार्गव, प्रिंसीपल डायरेक्टर एंड चीफ बीएमटी, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम ने कहा, “थैलेसीमिया दुनियाभर में आनुवांशिकी से प्राप्त होने वाले सबसे प्रमुख ब्लड डिसऑर्डर में से एक है, और दुनिया में हर आठवां थैलेसीमिक बच्चा भारत में रहता है। दुनिया में, थैलेसीमिया मेजर से ग्रस्त बच्चों की सबसे अधिक संख्या भारत में है। दुर्भाग्यवश बहुत से लोगों को तब तक यह पता नहीं होता कि वे इस कंडीशन से ग्रस्त हैं जबकि वे किसी गंभीर स्वास्थ्य संकट का शिकार नहीं बनते। यही कारण है कि इस रोग की शुरुआती स्टेज में ही पहचान करने लिए समय-समय पर स्क्रीनिंग और टेस्टिंग करना काफी महत्वूपर्ण होता है। आमतौर पर, प्रेग्नेंसी के 10वें सप्ताह में स्क्रीनिंग टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है ताकि इस रोग से बचा जा सके। लेकिन, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए इससे जुड़े विभिन्न हितधारकों को सक्रिय रूप से योगदान करने की जरूरत है।”

थैलेसीमिया से ग्रस्त होने के बावजूद अब इसका सफल उपचार करा चुके इन बच्चों की कहानियों से यह स्पष्ट हुआ कि देश में अब बीएमटी मुमकिन है और यह तेजी से सुलभ उपचार विकल्प बन रहा है। सरकारी तथा गैर-सरकारी संगठनों से वित्तीय सहायता उपचारी थेरेपी लेने वाले परिवारों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

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