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‘नीतीश युग का समापन’: बिहार के नए CM बनेंगे सम्राट चौधरी, जानें उनकी सियासी दास्तां

hindprabhatsamachar
By hindprabhatsamachar On April 14, 2026
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'सम्राट युग': बिहार के नए CM होंगे सम्राट चौधरी, जानें उनकी सियासी दास्तां

राम नरेश ठाकुर


Bihar News: बिहार की सियासत में मंगलवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया , जिसके बाद भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में राकेश कुमार उर्फ सम्राट चौधरी को नेता चुना गया है। बुधवार लोकभवन में सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इसके साथ ही बिहार में लंबे समय से चले आ रहे नीतीश युग का समापन और ‘सम्राट युग’ की शुरुआत होगी।

“यह केवल एक पद नहीं, बल्कि सेवा का पवित्र अवसर”

नए मुख्यमंत्री के रूप में चुने जाने पर सम्राट चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए केवल एक पद नहीं, बल्कि बिहार की जनता की सेवा, उनके विश्वास और सपनों को साकार करने का एक पवित्र अवसर है। मैं पूर्ण निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी के साथ जन-जन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का संकल्प लेता हूं।”

विरासत में मिली राजनीति

16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले के लखनपुर में प्रसिद्ध राजनेता शकुनी चौधरी के घर जन्मे सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली । उनके पिता समता पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे और लालू यादव तथा नीतीश कुमार के करीबी माने जाते थे। हालांकि, सम्राट की शैक्षणिक योग्यता को लेकर कई बार विवाद भी खड़ा हुआ है, लेकिन उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त है।

राजद से लेकर भाजपा तक का सियासी सफर

सम्राट चौधरी की राजनीतिक यात्रा अपने पिता के साथ राजद से शुरू हुई।

  • 1990: राजद की सदस्यता ग्रहण।
  • 1999: राबड़ी देवी सरकार में कृषि मंत्री बने, लेकिन कम उम्र के विवाद (तब वे न तो विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य थे) के चलते इस्तीफा देना पड़ा।
  • 2000 और 2010: परबत्ता सीट से विधायकी जीती।
  • 2014: जीतनराम मांझी के मुख्यमंत्री बनने पर राजद से 7 विधायकों को लेकर जदयू में शामिल हो गए और नगर विकास मंत्री बनाए गए।
  • 2015: नीतीश कुमार के सत्ता में वापस आने के बाद जीतनराम मांझी के गुट में शामिल होकर कुछ समय के लिए अलग-थलग पड़ गए।
  • 2018: भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी राजनीतिक रफ्तार तेज हो गई।
  • 2019: भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और एमएलसी।
  • 2023: बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष।
  • 2024: उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री।
  • 2025: तारापुर से चुनाव जीतकर फिर से उपमुख्यमंत्री बने और अब सीएम पद की शपथ लेने जा रहे हैं।

सुशील मोदी की जगह लेने वाले चेहरे

सम्राट चौधरी ने भाजपा का दामन तब थामा जब बिहार भाजपा में सुशील कुमार मोदी का छत्र शासन था। पार्टी को ऐसे नेता की तलाश थी जो मोदी के कद के बराबर या उससे बड़ा हो सके। भाजपा आलाकमान को सम्राट में यह क्षमता दिखी। सुशील मोदी के निधन के बाद सम्राट चौधरी का बिहार भाजपा पर एकतरफा राज हो गया है। मात्र 8 साल के भाजपा करियर में उन्होंने पार्टी के सर्वोच्च पद तक का सफर तय किया है।

जातीय समीकरण और ‘सम्राट ही क्यों?’ का सवाल

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का लंबा दबदबा रहा है, जिन्हें ‘लव-कुश’ (कुर्मी और कुशवाहा) जातियों का भारी समर्थन प्राप्त था। कुर्मी (2.87%) और कुशवाहा (4.27%) को मिलाकर यह लगभग 7 प्रतिशत का वोट बैंक है। नीतीश स्वयं कुर्मी थे, जबकि भाजपा ने उनकी जगह कोईरी (अत्यंत पिछड़ी जाति) से आने वाले सम्राट चौधरी को सेट किया है। पार्टी ने इस बदलाव के जरिए नई जातीय समीकरण तैयार करने की कोशिश की है।

कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह

सम्राट चौधरी के नाम पर सहमति बनने के बाद भाजपा समर्थकों में खुशी का माहौल । पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं:

  • माधव झा आजाद:“सम्राट चौधरी सुलझे हुए और संघर्षशील नेता हैं। भाजपायुक्त बिहार बनने का हमारा सपना साकार हो रहा है, इस खुशी में हम कावड़ यात्रा निकालेंगे।”
  • उमेश शर्मा: “सम्राट चौधरी बिहार को मजबूत नेतृत्व देंगे और विकास को और आगे ले जाएंगे।”
  • आदर्श कुमार: “यह भाजपा के लिए बहुत बड़ा दिन है। पहली बार बिहार को भाजपा का अपना मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है। अब सुशासन और भी मजबूत होगा।”
  • भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी: “नीतीश कुमार के आशीर्वाद और पीएम मोदी के मार्गदर्शन में यह सरकार चलेगी। परिवर्तन प्रकृति का नियम है और सभी कार्यकर्ता नीतीश जी का धन्यवाद कर रहे हैं कि उन्होंने भाजपा को नेतृत्व देने का मौका दिया।”
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