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57th IHGF Delhi Fair : क्रेता अपने आर्डर को अंतिम रूप देने में जुटे

hindprabhatsamachar
By hindprabhatsamachar On February 8, 2024
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ऋषि तिवारी


नोएडा। आईएचजीएफ दिल्ली मेला – स्प्रिंग 2024 का 57 वां संस्करण 6 से 10 फरवरी 2024 तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे में आयोजित किया जा रहा है, जो अपने नियमित क्रेता, संरक्षकों और पहली बार व्यापार करने वाले आगंतुकों को समान रूप से उत्साहित कर रहा है। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) द्वारा आयोजित यह मेला भारत की विविध भौगोलिक स्थितियाँ, विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और प्रचुर कच्चे माल के आधार से बने उत्पाद लेकर आया है। ईपीसीएच के अध्यक्ष श्री दिलीप बैद ने इस अवसर पर साझा किया, “यह मेला हमारे विदेशी खरीदारों, घर खरीदने वालों, खरीद एजेंटों और घरेलू वॉल्यूम खरीदारों के समर्थन से अपनी पूरी भव्यता पर है। कई नए कनेक्शन स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि मौजूदा कनेक्शन फिर से जीवित और सशक्त किए जा रहे हैं। नए आपूर्तिकर्ताओं की उत्पाद श्रृंखला और नियमित विक्रेताओं के नवाचारों दोनों का मूल्यांकन किया जा रहा है। कुछ ऑर्डर पूरे हो चुके हैं और अन्य को शो के बाद के फॉलो-अप के दौरान अंतिम रूप देने के लिए रखा गया है।”

अपनी बात को विस्तार देते हुए उन्होंने कहा, “आईएचजीएफ दिल्ली मेले में स्थिरता हमारे उत्पाद चयन का केंद्र बिंदु बनी हुई है, जिसमें अन्य वर्गीकरणों के अलावा पर्यावरण-अनुकूल घर, जीवन शैली, फैशन, कपड़ा और फर्नीचर वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला का प्रदर्शन किया गया है। प्रदर्शक और आपूर्तिकर्ता अधिक टिकाऊ और सुरक्षित भविष्य में योगदान देने के लिए समर्पित हैं। कई प्रदर्शक पर्यावरण-अनुकूल जीवंत उत्पाद पेश कर रहे हैं, जिनमें कपास और जूट की जीवन शैली सहायक वस्तुएं, प्राकृतिक रंगों का उपयोग करके हाथ से पेंट किए गए कारीगर परिधान, बेकार कपड़े और कागज से बने सजावट शिल्प, प्राकृतिक चक्रों के दौरान प्राप्त पौधों के फाइबर से तैयार किए गए फैशन सहायक उपकरण शामिल हैं। ये कई खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं।”

आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने कहा, ” ईपीसीएच भारतीय हस्तशिल्प उद्योग को स्थायी, समावेशी और संपन्न भविष्य के लिए चक्रीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के अनुकूल आपूर्ति श्रृंखलाओं पर जोर देने के साथ, जिम्मेदार विनिर्माण और हरित मूल्य श्रृंखलाओं की ओर आगे बढ़ने में मार्गदर्शन कर रहा है। जहां भी हमारे निर्यातक भाग लेते हैं उनके ये उत्पाद हैं न केवल दुनिया के शीर्ष होम और लाइफस्टाइल ब्रांडों की खुदरा बिक्री में अपनी जगह बनाते हैं, बल्कि प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय मेलों में सराहना भी हासिल करते हैं।”

ईपीसीएच के वाइस चेयरमैन द्वितीय डॉ. नीरज खन्ना ने कहा, “ईपीसीएच का वृक्ष प्रमाणन, जिसे ‘वैधता के माध्यम से स्थिरता’ के रूप में जाना जाता है, को सभी लकड़ी प्रजातियों के स्थायी व्यापार की गारंटी देने वाले मानक के रूप में वैश्विक मान्यता प्राप्त है। यह पहल ईपीसीएच के मिशन के मुताबिक ही है, जो सतत विकास के परस्पर जुड़े पर्यावरण, सामाजिक और आर्थिक आयामों पर जोर देने वाले संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप है।”
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री आर. के वर्मा ने इस मौके पर साझा किया, “आयोजन की विषय वस्तु पर महत्व देते हुए कई ऐसे सेमिनार आयोजित किए है जो प्रतिभागियों को गहरी समझ देते हैं इनमें नैविगेटिंग सस्टेनेबिलिटी एंड कार्बन इंपैक्ट, रिवाइविंग ट्रेडीशन एंड रिड्यूसिंग इंफैक्ट थ्रू सस्टेनेबल पाथवेज इन हैंडीक्राफ्ट सेक्टर और सिस्टम ऑप्टिमाइजेशन फॉर बेटर प्रॉफिटेबिलिटी विषयक सेमिनार शामिल हैं। इन सेमिनारों में प्रतिभागियों, आगंतुकों और अन्य लोगों ने बड़ी संख्या में शिरकत की।”

प्रिया अग्रवाल, अध्यक्ष, स्वागत समिति, आईएचजीएफ दिल्ली मेला- स्प्रिंग 2024 ने कहा, “मेले के दौरान आयोजित रैंप शो महत्वपूर्ण आकर्षिण साबित हो रहे हैं। इससे चुनिंदा उत्पादों को अधिक दृश्यता मिल रही है। इन प्रस्तुतियों में फैशन आभूषण, सहायक उपकरण और परिधान को प्रमुखता से दिखाया जाता है, जो उनकी अपील और आकर्षण पर जोर देता है।”
हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद के कार्यकारी निदेशक श्री आर.के वर्मा ने बताया कि ईपीसीएच दुनिया भर के विभिन्न देशों में भारतीय हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने और उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प उत्पादों और सेवाओं के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में विदेशों में भारत की छवि और होम,जीवनशैली,कपड़ा, फर्नीचर और फैशन आभूषण और सहायक उपकरण के उत्पादन में लगे क्राफ्ट क्लस्टर के लाखों कारीगरों और शिल्पकारों के प्रतिभाशाली हाथों के जादू की ब्रांड इमेज बनाने के लिए जिम्मेदार एक नोडल संस्थान है। इस अवसर पर ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री आर के वर्मा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान हस्तशिल्प निर्यात 30,019.24 करोड़ रुपये (3,728.47 मिलियन डॉलर) रहा।

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